मैंने जुबां की चोट से लोगों को बिलखते देखा है। मैंने जुबां की चोट से लोगों को बिलखते देखा है।
तू जो भी रंग ओढ़े, वही रंग , धरती से आसमां तक बिखर जाता है। तू जो भी रंग ओढ़े, वही रंग , धरती से आसमां तक बिखर जाता है।
ठंडी हवा के झोंके से दरवाज़ा खिड़की का खुल सा गया ठंडी हवा के झोंके से दरवाज़ा खिड़की का खुल सा गया
उदासी चहक रही है गुलाबी दुपट्टे में अविश्वस कबीर गा रहा है नफरत ने प्यार का..... उदासी चहक रही है गुलाबी दुपट्टे में अविश्वस कबीर गा रहा है नफरत ने प्या...
दुख के बादल हँस के काटे सुख की फुहार में संग भीगे सजना। दुख के बादल हँस के काटे सुख की फुहार में संग भीगे सजना।
आओ री सखी री, फिर वसंत आया। आओ री सखी री, फिर वसंत आया।